वक्र
| ज्यामिति |
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ओक्सीरिङ्कस पेपिरस (P.Oxy. I 29) जे यूक्लिडके एलीमेण्ट्सके एक टुकड़ा देखावैत हे |
| ज्यामितिके इतिहास |
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अनुसन्धानके क्षेत्र |
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बोलचालके भाषामे कौनो टेढ़ा-मेढ़ा रेखा वक्र (Curve) कहला हे । किन्तु गणितमे सामान्यतः, वक्र ऐसन रेखा हे जेकर प्रत्येक बिन्दु पर ओकर दिशामे कौनो विशेष नियमेसे परिवर्तन होवहे । ई ऐसन बिन्दुके पथ हे जे कौनो विशेष नियमेसे विचरण करहे । उदाहरणला यदि कौनो बिन्दुके दूरी एक नियत बिन्दुसे सदा समान रहहे, त बिन्दुपथ एक वक्र होवहे जेकरा वृत्त कहल जाहे । नियत बिन्दु ई वृत्तके केन्द्र होवहे । यदि वक्रके समस्त बिन्दु एक समतलमे हे त ओकरा समतल वक्र (Plane curve) कहल जाहे, अन्यथा ओकरा विषमतलीय (Skew) या आकाशीय (Space) वक्र कहल जाहे ।
परिचय
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]प्रत्येक समतल वक्र दु चरके केवल एक समीकरण द्वारा व्यक्त किया जा सकहे । यदि कौनो वक्रके कार्तीय (Cartesian), या प्रक्षेपीय निर्देशाङ्कके केवल एक स्वतन्त्र चर, या प्राचल (parameter), के बीजीय फलनके रूपमे लिखल जा सके, त वक्रके बीजीय वक्र (Algebraic curve) कहल जाहे । ई वक्रके समीकरणमे केवल बीजीय फलने आवहे । यदि समीकरणमे अबीजीय (transcendental) फलन आवहे, त वक्र अबीजीय वक्र कहला हे । विभिन्न शाङ्कव बीजीय वक्रके आउ चक्रज (cycloid), कैटिनरी (catenary) आदि, अबीजीय वक्रके उदाहरण हे । वक्र प्रथम, द्वितीय, तृतीय, कोटिके कहल जाहे, यदि उनखर समीकरणमे x, या y के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, घात आवहे । वृत्त, दीर्घवृत्त (ellipse), परवलय (parabola), अतिपरवलय (hyperbola) द्वितीय कोटिके वक्रके उदाहरण हे । वक्र कौनो बिन्दु पर असन्ततो (Discontineous) हो सकहे । सन्तत वक्र पर विचार करैत खन्नि ओकरा बिन्दुके एक एकल अनन्तीके रूपोमे लेल जा सकहे ।
बीजीय वक्र
[सम्पादित करथिन | स्रोत सम्पादित करथिन]कौनो बीजीय वक्र कहुँ टूट नै सके, या असन्तत नै हो सके । ओकर स्पर्शरेखा (tangents) के दिशामे एकचकहीँ परिवर्तन नै हो सके । ओकर कौनो भाग एक सीधा रेखा नै हो सके । ई प्रकार कौनो बीजीय वक्रके ई एक सामान्य लक्षण हे कि ओकरा बनावेवाला बिन्दुके विभिन्न स्थिति क्रमिक आउ सन्तत होवहे आउ ईसभ बिन्दु पर खीँच गेल स्पर्शरेखाके दिशामे परिवर्तनो क्रमिक आउ सन्तत होवहे ।
परिभाषा
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गणितमे वक्र के निम्नलिखित प्रकरासे परिभाषित कैल जाहे -
मानली वास्तविक सङ्ख्याके कौनो देल हुआ अन्तराल हे । अर्थात् ई
के एक अशून्य एवं संयुक्त (connected) उपसमुच्चय हे; त सतत प्रतिचित्रण (mapping)
के वक्र
कहल जाहे । हियाँ
टोपोलोजिकल स्पेस हे ।